Sunday, 3 May 2015

सप्तरीमे मातृभाषा मैथिलीमे पठन–पाठन प्रारम्भ, किछु व्यक्ति तथा संस्थाद्वारा भ्रामक प्रचार करैत अवरोध

सप्तरीमे मातृभाषा मैथिलीमे पठन–पाठन प्रारम्भ 

 किछु व्यक्ति तथा संस्थाद्वारा भ्रामक प्रचार करैत अवरोध



 

सघन साक्षरता अभियानमे जिला शिक्षा कार्यालय सप्तरी मैथिली भाषाके पाठ्यपुस्तक अनिवार्य रुपमे लागु कएलाक बादो किछु संघसंस्था नेपाली भाषाके पाठ्यपुस्तक आ शिक्षणके माध्यम सेहो नेपालीमे करए जा रहल अछि । तैं सम्पूर्ण मैथिलीभाषी सभ अपनअपन ठामसँ सजग सशक्त भ कए आगु बढी । बहुत गम्भीर सवाल अछि हमर अहाँक लेल, सप्तरीमे मातृभाषा मैथिलीमे पठनपाठन प्रभावहिन कहि कए किछु लोग एकरा विफल करएमे लागल अछि ।



      मैथिलीभाषीके बाहुल्य रहल सप्तरी जिलामे मैथिली भाषामे पठनपाठन नहि होयत त कि रुकुम, रोल्पा, अछाम, सोलु ईत्यादी जिलामे मैथिली प्रभावकारी होयत ? अहि स पहिने सञ्चालन भेल साक्षरता कक्षामे डोको के मतलब हमर अहाँक बाबुमैयाँ, दादादादी नहि बुझै छलै, मुदा एहिबेर डोको के ठाम पर ‘ढकिया पढाओल जा रहल छै । एहि स पहिने माइती शब्द छलै, एहिबेर नैहर लिखल छै । अहीँ सभ कहुँ सप्तरीक प्रौढ सभके बुझएमे कोन भाषा सहज हेतै ? ईहो भ्रम फैलाओल जा रहल छै जे मैथिली अर्थात तिरहुता लिपीके विषयमे, पाठ्यपुस्तकमे तिरहुता लिपीके चर्चो नहि कएल गेल अछि । बात रहलै शुद्धाशुद्धीके त साक्षरता अभियानमे व्याकरणके ज्ञान नहि, अपन नामगाम लिखए, गन्ती करए, अंक चिन्हए, मोबाइलके नम्वर दाबए जँका सामान्य ज्ञान देल जा रहल अछि ।



      अभियानमे खटल सहयोगी कार्यकर्तासभ मैटिक पास छै । सहयोगी कार्यकर्ता मैथिलीभाषी आ सहभागी सेहो मैथिली भाषीये छै तखन समस्या कथी कए ? आओर सहज भेनाइ स्वाभाविक छै । जतय कक्षा चलिरहल छै ततए हँसी मजाक संगहि केयो अ आ इ ई, क ख ग घ त केओ अपन नाम लिखए अभ्यास क रहल छथि । महत्वपूर्ण ई छै जे कक्षा सञ्चालनमे एखनो ढिलाइ भ रहल छै । एहिके लेल शिक्षा कार्यालयके दवाव देल जाय......



      पीस नेपाल नामक संस्थाद्वारा सप्तरी जिलाक बनौला गाममे सञ्चालित कक्षा अवलोकनके लेल स्वस्फूर्त रुपमे मैथिली साहित्य परिषदक अध्यक्ष शुभचन्द्र झा, हम सचिव श्यामसुन्दर यादवसहितके पदाधिकारी गेल छलौं कक्षा अवलोकन कए हमसभ अति उत्साहित छी । यद्यपी किछु संस्थाक सभ शिक्षा कार्यालयक निर्णय आ सम्झौता विपरित नेपालीमे पढाबए जा  रहल अछि । तैं सम्पूर्ण जिलावासीसँ आग्रह जे अहाँक गाम आ टोलमे जँ नेपाली भाषाक पाठ्यपुस्तक पढाबए जा रहल अछि त तत्काल रोक लगाओल । मैथिली साहित्य परिषद्द्वारा कएल गेल एकटा सकारात्मक प्रयासके विफल बनौनिहारके पहिचान कएल जाउ । नेपालक २०४७ सालक संविधान आ अन्तरिम संविधानमे सेहो मातृभाषाके सुनिश्चितता कएल गेल अछि । देश संघीय संरचनामे जा रहल अवस्थामे फेर वएह एक भाषा एक भेषके पृष्ठपोषण क रहल व्यक्ति आ संस्था सभके अविलम्ब रोकल जाय । संगहि सम्पूर्ण मैथिली मातृभाषी सभसँ बिनम्र आग्रह अछि अपन अपन ठामसँ एकतावद्ध भेल जाय । हमसभ मातृभाषाक लेल सशक्त आन्दोलन करए जा रहल छी । कृपया अपन बिचार सहित एकरा बेसी स बेसी शेयर कएल जाउ ।











































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